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मुग़ल साम्राज्य का रोचक इतिहास

मुगल वंश (1526-1540तथा 1555-1707)

जहीरुद्दीन बाबर1526-1530ई.
हूमायॅू1530-1540ई. तथा 1555-1556ई.
अकबर1556-1605ई.
जहांगीर1605-1627ई.
शाहजहॉ1627-1658ई.
औरंगजेब1658-1707ई.


सूरवंश (1540-1555ई.)


शेरशाह सूरी1540-1545ई.
इस्‍लाम शाह1545-1553ई.
आदिल शाह1553-1555ई.

शेरशाह का प्रशासन

शेरशाह ने अलाउद्दीन खिलजी की शासन पद्धति के आधार पर अफगान राज्‍य की स्‍थापना की। इसके काल मे पॉच प्रमुख विभाग थे

दीवान-ए-विजारतभू-राजस्‍व
दीवान-ए-आरिजसैन्‍यविभाग
दीवान-ए-रिसालतधार्मिक
दीवान-ए-कजान्‍याय

अकबर

अकबरने 1579 में महजर का पाठ किया बाबर, हुमायॅू, तहॉगीर जिसे फैजी ने तैयार किया था। महजर की घोषणा के बाद अकबर ने सुल्‍तान-ए-आदिल की उपाधि धारण की।

उसने इबादतखाने मे जैन विद्वान जिनचन्‍द्र सूरी और हरिविजय सूरी से वाद-विवाद किया।
हरिविजय को जगतगुरु तथा जिनचन्‍द्र को युग प्रधान की उपाधि दी।

हरिविजय सूरी से प्रभावित होकर उसने पशु-पक्षियों के वध को प्रतिबंधित कर दिया। दस्‍तुरजी मेहरजी राणा पारसी विद्वान थें।

सर एण्‍टोन मानसरैत और फादर एकाविवा से भी अकबर का वाद-विवाद हुआ।

हिन्‍दू विद्वानो मे पुरुषोत्‍तम तथा देवी से भी वाद-विवाद हुआ। अकबर ने सिख गुरु रामदास को स्‍वर्ण मंदिर बनवाने के लिए 500बीघे जमीन दी।

अकबर ने विट्ठलनाथ को जैतपुर और गोकुल की जागीर दी।

अकबर ने 1582मे एकेश्‍वर वाद का समर्थन करते हुऐ तौहीद-ए-इलाही की स्‍थापना की

अकबर ने अबुल-फजल को इस धर्म का मुख्‍य पुरोहित बनाया तथा रविवार का दिन इस धर्म मे सामिल होने के लिए रखा।

बीरबल एक मात्र हिन्‍दू राजा थे जिन्‍होने इस धर्म को स्‍वीकार किया।

अकबर ने हीजरी सम्वत् सौर वर्ष के आधार पर शुरु वश्‍यावृत्ति मे लिप्‍त औरतों को शहर के बाहर शैतानपुर नामक बस्‍ती मे बसने को कहा। अकबर ने सुर्य की उपासना तथा चिश्‍ती सिलसिले मे गहरी आस्‍था जाहिर की। अकबर ने इलाही कलेंडर 1583 मे जारी किया।

अकबरकालीन युद्ध


वर्षयुद्धशासक
1556पानीपत का द्वितीय युद्धहेमू
1561तथा62मालबाबाज बहादुर
1562आमेरभारमल
1562मेडताजयमल
1564गोडवानावीरनारायण दुर्गावती
1569रणथम्‍भौरसूरजन हाडा
1570मारवाडरावचन्‍द्र सेन
1574-76बिहार तथा बंगालदाऊद खां
1576हल्‍दीघाटीराणा प्रताप
1581काबुलहकीम मिर्जा
1586काश्‍मीरयुसुफ खां तथा याकूब खां
1591सिंधजानी बेग
1591उडीसानिसार खां
1595बलूचिस्‍तानपन्‍नी अफगन
1595कन्‍धारमुजफ्फर हुसैन
1599दौलताबादचांदबीबी
1600अहमदनगरबहादुरशाह व चांदबीबी
1601असीरगढमीरनबहादुर

अकबरकालीन प्रमुख निर्णय

दास प्रथा का अन्‍त1562
तीर्थयात्रा कर की समाप्ति1563
जजिया कर समाप्‍त1564(1679इसे औरंगजेब ने पुन:लागू कर दिया।)
फतेहपुर सीकरी की स्‍थापना1571
बुलन्‍द दरवाजा का निर्माण1572
इबादत खाना का निर्माण1575
मनसबदारी का आरंभ1579
महजरनामा का प्रारंभ1579
दीन-ए-इलाही की घोषणा1582(इसे तौहीद-ए-इलाही भी कहा गया है)

मुगलकालीन मकबरे

शासकमकबरानिर्माता
बाबरकाबुल (अफगानिस्‍तान)हुमायूं
हुमायूंदिल्‍लीगुलवदन बेगम
अकबरसिकन्‍दरा(आगरा)जहांगीर
जहांगीरलाहौर (पाकिस्‍तान)नूरजहां
शाहजहांआगरा (ताजमहल)शाहजहां
औरंगजेबदौलताबाद (औरगाबाद,महाराष्‍ट्र)
शेरशाह सूरीसासाराम (बिहार,स्‍वयं द्वारा निर्मित)शेरशाहसूरी


मुगलकालीन इमारतें


बाग/इमारतस्‍थानशासक
आरामबागआगराबाबर
शालीमार बागकश्‍मीरजहॉगीर
पुराना किलादिल्‍लीशेहशाह
इलाहाबाद का किलाइलाहाबादअकबर
फतेहपुर सीकर मे जोधाबाई महल, पंच महल, मरीयम महल, बीरवल महलआगराअकबर
एत्‍माछौलाफतेहपुर सीकरीअकबर
दीवाने आम, दीवाने खास, मोती मस्जिद, खास महलआगराकिलानूरजहां
लाल किलादिल्‍लीशाहजहॉ
जामा मस्जिददिल्‍लीशाहजहॉ
मोती मस्जिददिल्‍ली के लाल किलेऔरंगजेब
बीवी का मकबराऔरंगाबादऔरंगजेब

मुगल कालीन चित्रकार

शासकचित्रकारविशेष/उपाधि
बाबरजियहाक--
हमायॅूमीर सैयद अली अब्‍दुल समदनादिर उलअर्श शीरी कलम
अकबरदशवन्‍त बसावन केशव सावलदास ताराचन्‍दराज्‍यनामा की चित्रकारी (सर्वश्रेष्‍ठ प्राकृतिक चित्रों का चित्रकार)
जहॉगीरविसनदास अब्‍दुल हसन मुहम्‍मद नादिर मनोहर मंसूरनादिर उल्‍जामा पक्षियों का चित्रका

मुगलकालीन साहित्‍य

तुलसीदासरामचरित मानस, कवितावली विनय पत्रिका, गीतावली
सूरदाससूरसागर
रसखानप्रेमवाटिका
मलिक मुहम्‍मद जायसीपद्मावत
बिहारीलालबिहारीसतसई
भूषणशिवराज भूषण
नरोत्‍तम दाससुदामा चरित

उर्दू साहित्‍य - उर्दू भाषा का विकास दिल्‍ली सल्‍तनत काल में हुआ था लेकिन भाषा के रुप मे इसका विकास परवर्ती मुगलो के काल मे हुआ। अमीर खुसरो ने इसे कविता का माध्‍यम बनाया। मुहम्‍मद शाह(1719-1748) के काल मे उर्दू का सर्वाधिक विकास हुआ।

फारसी- यह मुगल दरबार की भाषा थी। अकबर का काल फारसी भाषा के पुनर्जागरण का काल था। अकबर का नवरत्‍न फैजी,अकबर का राजकवि और सर्वश्रेष्‍ठ फारसी विद्वान था। जहांगीर ने अपने शासनकाल के 16वें वर्ष तक अपनी आत्‍मकथा तुजुक-ए-जहांगोरी की रचना की। मुगलों मे फारसी का सर्वश्रेष्‍ठ विद्वान शाहजहां का बडा लडका दारशिकोह था। इसने भागवद् गीता, उपनिषद तथा रामायण का फारसी अनुवाद कराया। 52उपनिषदों का फारसी अनुवाद सीर-ए-अकबर(महान रहस्‍य) कहलाया। अन्‍य प्रमुख फारसी साहित्‍य निम्‍न है

बाबरनामा यह स्‍वयं बाबार द्वारा तुर्की मे लिखित तुजुक-ए-बाबरी का फारसी मे अनुदान है जिसे अब्‍दुर्रहीम खानखाना ने 1583ई. मे किया।

हुमायूंनामा - यह गुलबदन बेगम द्वारा दो भागो मे लिखित हुमायूं की आत्‍मकथा है।

तारीख-ए-अकबरी – इसकी रचना अब्‍दुल कादिर बदायूंनी ने 1590ई. मे तीन भागो मे की थी। यह भारत के इतिहास से संबंधित है।

तुजुक-ए-जहांगीरी – यह जहांगीर की आत्‍मकथा है जो उसी के द्वारा लिखि गई है

पादशाहनामा- यह तीन भागों मे लिखित शाहजहां के शासनकाल का इतिहास है। पहला भाग मोहम्‍मद अमीन कजवीनी द्वारा, दूसरा भाग अब्‍दुल हमीद लाहौरी द्वारा तथा तीसरा भाग मोहम्मद वारिस द्वारा रचित है।

शाहजहांनामा – इसकी रचना इनायत खां ने की। यह औरगजेब के पहले कुछ वर्षो का इतिहास है

आलमगीनामा- यह भी औरंगजेब के काल का इतिहास है। इसकी रचना काजिम शीराजी ने की थी

प्रमुख अनुवादित रचनाएं (फारसी भाषा मे)


रचनाअनुवादक
रामायणअब्‍दुल कादिर बदायुंनी
महाभारत (रज्‍मनामा)बदायुंनी व नकीब खां
पंचतात्र (अनवर ए सुहैली)अबुल फजल
तुजुक-ए-बाबरीरहीम
भगवत पुराणराजा टोडरमनल
लीलावतीफैजी
अथर्ववेदहादी इब्राहिम सर हिंदी

मुगलकालीन संगीत कला(Music)

मालवा के बाजबहादुर, अकबर, जहॉगीर और शाहजहां के काल में संगीत कला का बहुत विकास हुआ। अबुल-फजल के अनुसार अकबर के समय मे 36गायक थे। तानसेन के गुरु हरिदास थे। तानसेन ने ध्रुपद गायनकी खोज की। मियां की मल्‍हार और मियां की तोडी राग की खोज भी तानसेन ने ही की। तानसेन का वास्‍तविक नाम राम तनु पाण्‍डेय था।

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Post On 2018-07-19