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बाबर-

  • बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 ई. को ट्रांसऑक्सियाना के एक छोटे से राज्य फरगना में हुआ। इसका पुरा नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था। इसके पिता का नाम उमर शेख मिर्जा (तैमूर वंश) तथा माता का नाम  कुतलुग निगार खानम (चंगेज खान के वंशज) था। वह  कृष्णदेव राय  नुसरत शाह का मसकालिन था। 
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुके- बाबरी तुर्की भाषा में लिखी थी।
  •  1494 ई.में 12 वर्ष की अल्पायु में बाबर ट्रांस व ऑक्सियाना फरगना नामक एक छोटे से राज्य की गद्दी पर बैठा।
  • मध्य एशिया के अन्य संख्यक आक्रमणकारियों की तरह बाबर भी भारत के धन-ध्यान की ख्याति सुनकर उसकी ओर आकृष्ट हुआ था। 
  • उसने सुन रखा था कि भारत सोने चांदी का देश है। तैमूर यहां से अतुलित संपत्ति एवं कुशल कारीगर लेकर लौटा था, जिसकी बदौलतजिसकी बदौलत उसने अपने एशियाई साम्राज्य को सुदृढ़ता प्रदान की थी तथा अपनी राजधानी को भव्य बनाया था, साथ ही उसने पंजाब के कुछ इलाकों को अपने साम्राज्य में भी मिला लिया था।
  • उत्तर पश्चिम भारत की राजनीतिक परिस्थिति भारत में बाबर के प्रवेश के लिए उपयुक्त थी। 1570 ई. मे सिकंदर लोदी की मृत्यु हो चुकी थी तथा दिल्ली की गद्दी पर इब्राहिम लोदी आसीन था। 
  • अफगान सरदारों में एक सबसे दुर्धर्ष व्यक्ति पंजाब का सूबेदार दौलत खान लोदी था। दौलत खान पंजाब का लगभग स्वतंत्र शासक था।
  •  1518-19 ईण् में बाबर ने  भेरा के शक्तिशाली दुर्ग को जीत लिया। जब बाबर काबुल लौटा तो  दौलत खाॅं ने उसके प्रतिनिधि को  भेरा से निकाल दिया।
  •  1520-21 ई. में बाबर ने एक बार फिर सिंधु नदी पार कर आसानी से भेरा और सियालकोट को जीत लिया।

बाबर की भारत-विजय की आकांक्षा का एक और भी कारण यह था कि उसे काबुल से बहुत कम आमदनी होती थी।

पूरा नामजहीर-उद-दीन मुहम्मद बाबर
लोकप्रिय नाम बाबर
जन्म 14 फरवरी 1483 ( अन्दिझान, उज्बेकिस्तान )
दादा मीरां शाह
दादीकुतलुग निगार ख़ानुम पुत्री यूनुस खान (मुगलिस्तान का शासक )
पिता उमर शेख मिर्जा 2, फरगाना के शेख
माताकुतलुग निगार ख़ानुम
पत्नियाँआयेशा सुलतान बेगम, जैनाब सुलतान बेगम, मौसमा सुलतान बेगम, महम बेगम, गुलरुख बेगम, दिलदार बेगम, मुबारका युरुफझाई, गुलनार अघाचा.
पुत्र/पुत्रियां हुमायूं, कामरान मिर्जा, अस्करी मिर्जा, हिंदल मिर्जा, फख्र -उन-निस्सा , गुलरंग बेगम, गुलबदन बेगम, गुलचेहरा बेगम, अल्तून बिषिक, कथित बेटा
भाईचंगेज़ खान



बाबर का बचपन और शुरुआती जीवन – Mughal Emperor Babar

  1. मुगल सम्राट बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को आन्दीझान शहर के फरगना घाटी में जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर के रुप में हुआ था। बाबर के पिता का नाम उमरेशख मिर्जा था जो फरगना की जागीर का मालिक था और उसकी मां का नाम कुतुलनिगार खां था।
  2. बाबर अपनी पिता की तरफ से तैमूर के वंशज और अपनी मां की तरफ से चंगेज खान के वंशज थे। इस तरह जीत हासिल करना और कुशल प्रशासन बाबर के खून में ही था।
  3. Mughal – मुगल बादशाह बाबर मंगोल मूल के बरला जनजाति से आए थे, लेकिन जनजाति के अलग-अलग सदस्य भाषा, रीति-रिवाज और लंब समय से तुर्की क्षेत्रों में रहने की वजह से खुद को तुर्की मानते थे। इसलिए मुगल सम्राट ने तुर्कों से बहुत समर्थन हासिल किया और जिस सम्राज्य की उन्होनें स्थापना की थी वह तुर्की थी।
  4. आपक बता दें कि बाबर का परिवार चगताई कबीले के सदस्य बन गया था उन्हें इस नाम से ही पुकारा जाता था। वो पितृ पक्ष की ओर से तैमूर के पांचवे वंशज और मातृ पक्ष की तरफ से चंगेज खां के 13वें वंशज थे।
  5. बाबर ने जिस नए सम्राज्य की स्थापना की। वह तुर्की नस्ल का “चगताई वंश” का था। जिसका नाम चंगेज खां के दूसरे बेटे के नाम पर पड़ा था। बाबर की मातृ भाषा चगताई थी जिसमें वे निपुण थे बाबर ने बाबरनामा के नाम से चगताई भाषा में अपनी जीवनी भी लिखी थी लेकिन फारसी उस समय की आम बोलचाल की भाषा थी।
  6. बाबर के पिता, उमर शेख मिर्जा ने फरगाना की घाटी पर शासन किया था। क्योंकि उस समय तुर्कों के बीच उत्तराधिकार का कोई निश्चत कानून नहीं था।
  7. वहीं बाबर जब महज 11 साल के ही थे तब उनके पिता उमर शेख मिर्जा दुनिया को अलविदा कह गए जिससे छोटी से उम्र से ही बाबर जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गए। शुरुआती दौर बाबर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण और संघर्षमय रहा है लेकिन बाद में इसी मुगल सम्राट ने भारत के कई हिस्सों पर राज किया।
  8. आपको बता दें कि बाबर ने शुरुआती दौर में अपने पैतृक स्थान फरगना पर जीत तो हासिल कर ली थी लेकिन वे बहुत समय पर उस पर राज नहीं कर पाए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था उस समय उन्हें बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ा था।
  9. लेकिन इस समय मुगल सम्राट का कई सहयोगियों ने साथ नहीं छोड़ा था। वहीं कभी हार नहीं मानने वाले मुगल सम्राट ने एक ऐसा पासा फेंका कि अफगानिस्तान के शासक बन गए। दरअसल विलक्षण प्रतिभा के धनी सम्राट बाबर ने उस समय का फायदा उठा लिया जब उसके दुश्मन एक-दूसरे से दुश्मनी निभा रहे थे और 1502 में अफगानिस्तान के काबुल में जीत हासिल की।
  10. जिसके बाद उन्हें ‘पादशाह’ की उपाधि धारण मिल गई। पादशाह से पहले बाबर ”मिर्जा” की पैतृक उपाधि धारण करता था।
  11. फौलादी इरादों वाले इस मुगल बादशाह ने उस समय अपने पैतृक स्थान फरगना और समरकंद को भी जीत लिया।
  12. आपको बता दें कि मुगल बादशाह बाबर ने 11 शादियां की थी उनकी 11 बेगम थी जिनके नाम आयेशा सुल्तन बेगम, जैनाब सुल्तान बेगम, मौसमा सुल्तान बेगम, महम बेगम, गुलरुख बेगम, दिलदार बेगम, मुबारका युरुफझाई और गुलनार अघाचा था।
  13. अपनी बेगमों से बाबर के 20 बच्चे थे। बाबर ने अपने पहले बेटे हुमायूं को अपना उत्तरराधिकारी बनाया था।

 

 

बाबर के आक्रमण के समय भारतीय राज्य

राज्य

 शासक

1.

दिल्ली

 इब्राहिम लोदी

2.

 सिंध

 शाहबेग अरमून

3 .

कश्मीर

 मुहम्मद शाह

4.

 मालवा

 महमूदशाह-II

5.

 गुजरात

 बहादुरशाह

6.

 बंगाल

 नुसरतशाह

7.

 मेवाड़

 राणा सांगा

8.

 विजयनगर

 कृष्णदेव राय

 

बाबर के शासन काल में लड़े गए प्रमुख युद्ध

युद्ध का नाम 

 वर्ष

   प्रतिपक्षी शासक

परिणाम

पानीपत का प्रथम युद्ध

1526 ईस्वी

इब्राहिम लोदी

बाबर विजयी

खानवा का युद्ध

 1527 ईस्वी

 राणा सांगा

बाबर विजयी

चंदेरी का युद्ध

1528

 ईस्वी मेदनी राय

बाबर विजयी

घाघरा का युद्ध

1529

   ईस्वी अफगानों की सम्मिलित सेना

बाबर विजयी


पानीपत की लड़ाई : (21 अप्रैल, 1526)

  1. पानीपत की पहली लड़ाई बाबर की सबसे बड़ी लड़ाई थी। यह लड़ाई अप्रैल 1526 में शुरू की गई थी जब बाबर की सेना ने उत्तर भारत में लोदी साम्राज्य पर हमला किया था।
  2. इब्राहिम लोदी ने विशाल सेना लेकर पानीपत में बाबर का सामना किया।
  3. बाबर ने 12000 लोगों की सेना के साथ सिंधु नदी पार की थी। बाबर ने दो कुशल उस्मानिया तोपचियों- उस्ताद अली और मुस्तफा की सेवाएं भी प्राप्त कर ली थी। उस वक्त भारत में बारूद का उपयोग धीरे-धीरे विकसित हो रहा था। 
  4. इस युद्ध में बाबर को विजय प्राप्त हुई तथा इब्राहिम लोदी की मृत्यु हो गयी। पानीपत की लड़ाई को भारतीय इतिहास की निर्णायक लड़ाइयों में गिना जाता है।
  5. इस लड़ाई से लोदी शक्ति की रीढ़ टूट गई तथा दिल्ली से आगरा तक के संपूर्ण क्षेत्र पर बाबर का नियंत्रण स्थापित हो गया। बाबर को दो और कठिन लड़ाईयां लड़नी पड़ी- पहला, मेवाड़ के राणा सांगा के विरुद्ध तथा दूसरा, पूर्वी अफगानों के खिलाफ।
  6. बाबर ने अपनी आत्मकथा में कहा है कि उसने सर्वप्रथम बारूद का प्रयोग भेरा के किले पर हमला करते समय किया था।
  7. इस युद्ध में बाबर ने तुलगमा पद्धति का प्रयोग किया था।
  8. इस लड़ाई के लिए इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान और पंजाब के सूबेदार ने बाबर को पानीपत की लड़ाई के लिए न्योता भेजा था। वहीं कुशल शासक बाबर ने इस लड़ाई में लड़ने से 4 बार पहले पूरी इसकी जांच की थी।
    वहीं इस दौरान जो लोग अफगानिस्तान के लोगों ने भी बाबर को अफगान में आक्रमण करने का भी न्योता दिया था। यही नहीं मेवाड़ के राजा राना संग्राम सिंह ने भी बाबर इब्राहिम लोदी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए लिए कहा क्योंकि इब्राहिम लोदी से राणा सिंह ही पुरानी रंजिश थी और वे अपनी इस रंजिश का बदला लेना चाहते थे। जिसके बाद बाबर ने पानीपत की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया। यह मुगल बादशाह द्धारा लड़ी सबसे पुरानी लड़ाई थी जिसमें गनपाउडर आग्नेयास्त्रों और तोपखाने का इस्तेमाल किया गया था। इस युद्ध में इब्राहिम लोदी ने खुद को हारता देख खुद को मार डाला। जिसके बाद बाबर ने मुगल सम्राज्य का भारत में विस्तार करने की ठानी। पानीपत की लड़ाई में जीत मुगल सम्राट की पहली जीत थी। इस जीत से उन्होनें भारत में मुगल सम्राज्य की शक्ति का प्रदर्शन किया था। और ये मुगलों की भी भारतीय इतिहास में सबसे बड़ी जीत भी थी।

युद्ध

 वर्ष

पानीपत का प्रथम युद्ध

21 अप्रैल, 1526

 खानवा का युद्ध

 16 मार्च, 1527

 चंदेरी का युद्ध

 29 जनवरी, 1528

 घाघरा का युद्ध

 5 मई, 1529

 चौसा का युद्ध

 26 जून, 1539

 कन्नौज का युद्ध

 17 मई, 1540

खानवा की लड़ाई ( 16 मार्च 1527 ई.) 

          राणा सांगा के खिलाफ लड़ी खानवा की लड़ाई – Battle of Khanwa

उसने जोश भरने के लिए बाबर ने पूरी गंभीरता से ऐलान किया कि यह लड़ाई है, अपने को सच्चा मुसलमान दिखाने के लिए (जिहाद का नारा ) लड़ाई से 1 दिन पहले उसने अपने सैनिकों के सामने शराब की समूची सुराहियां उलीच दी एवं सारे पैमाने तोड़ डाले।

बाबर की आत्मकथा

बाबर ने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक ए बाबरी की रचना की थी। इसे बाबरनामा (वाकियाते-बाबरी) के नाम से भी जाना जाता है। सर्वप्रथम अकबर के समय में इसका फारसी भाषा में अनुवाद पायंदा खाँ ने किया। इसके पश्चात 1590 ईस्वी में अब्दुल रहीम खान ने इसका फारसी में अनुवाद किया। बाबरनामा का फारसी भाषा में अंग्रेजी अनुवाद सर्वप्रथम लीडन,अर्सकिन व एल्किंग ने 1826 ई. में किया।

अफगानी शासकों के खिलाफ घागरा की लड़ाई – Battle of Ghagra

राजपूत शासक राणा संग्राम सिंह को हराकर बाबर ने जीत तो हासिल कर ली लेकिन इसके बाबजूद भी भारत में मुगल शासक बाबर की स्थिति इतनी मजबूत नहीं हुई थी दरअसल उस समय बिहार और बंगाल में कुछ अफगानी शासक शासन कर रहे थे जिन्हें बाबर का भारत में राज करना रास नहीं आ रहा था जिसके बाद बाबर को अफगानी शासकों के विरोध का सामना करना पड़ा था। मई 1529 में बाबर ने घागरा में सभी अफगानी शासकों को हराकर जीत हासिल की।

बाबर कम उम्र से ही अपने जीवन में इतनी लड़ाइयां लड़ चुका था कि अब तक वो एक मजबूत शासक बन गया था और उसके पास एक बड़ी सेना भी तैयार हो गई थी अब बाबर को चुनौती देने से कोई भी शासक डरने लगा था।

इस तरह से भारत में तेजी से मुगल सम्राज्य का विस्तार किया और भारत में जमकर लूट-पाट की। इतिहास के पन्नों पर बाबर की वीरता के साथ उसके क्रूरता के भी कई उदाहरण हैं दरअसल बाबर अपने फायदे के लिए नरसंहार करने से भी नहीं हिचकिचाता था।

बाबर पूजा-पाठ में यकीन नहीं करता था उसने अपने शासनकाल में भारत में कभी किसी हिन्दू को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा। वह अय्याश और शौकीन मुगल शासक था बाबर – Babur ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए आगरा, उत्तरप्रदेश में एक सुंदर सा बगीचा भी बनवाया था।


बाबर के भारत आगमन का महत्व

बाबर ने राज्य की एक नई अवधारणा का सूत्रपात किया। इस राज्य का आधार बादशाह की शक्ति और प्रतिष्ठा थी। 

मुगल बादशाह बाबर की मृत्यु – Babur Death

मुगल बादशाह बाबर ने अपने आखिरी समय में लगभग भारत के ज्यादातर इलाकों में मुगल सम्राज्य का विस्तार कर दिया था बाबर ने पंजाब,दिल्ली और बिहार जीत लिया था। बाबर ने अपनी मौत से पहले अपनी आत्मकथा बाबरनामा लिखी थी जिसमें उसमें अपनी बहादुरी की सभी छोटी-बड़ी बातों का जिक्र किया था इसके साथ ही बाबरनामे में मुगल शासक ने उसके जीवन की सभी लड़ाइयों का भी का उल्लेख किया था।

1530 में बाबर की मौत बीमारी की वजह से हो गई थी बाबर का अंतिम संस्कार अफगानिस्तान में जाकर हुआ था। बाबर की मौत के बाद उसके बड़े बेटे हुमायूं को मुगल सम्राज्य का उत्तराधिकारी बनाया गया और उन्होनें दिल्ली की सल्तनत पर राज किया।

बाबर की विरासत

Babur – बाबर को मुगल साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है, भले ही मुगल साम्राज्य को उनके पोते अकबर ने मजबूती दी थी लेकिन बाबर का कुशल और शक्तिशाली नेतृत्व अगले दो पीढि़यों को प्रेरित करता रहा। बाबर का व्यक्तित्व संस्कृति, साहसिक उतार-चढ़ाव और सैन्य प्रतिभा जैसी खूबियों से भरा हुआ था।

बाबर एक आकर्षक और धनी प्रतिभा का व्यक्तित्व था। वो एक शक्तिशाली, साहसी, कुशल और भाग्यशाली होने के साथ मुगल साम्राज्य का निर्माता था। बाबर एक प्रतिभाशाली तुर्की कवि भी था, जो प्रकृति से बेहद प्रेम करता था।

जिसने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए बगीचों का भी निर्माण करवाया था। इसके साथ ही बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा भी लिखी थी। जिसका तुर्की से फारसी में अनुवाद 1589 में अकबर के शासनकाल में किया गया था।

मुगल बादशाह बाबर को उजबेकिस्तान का राष्ट्रीय नायक भी माना जाता था, और उनकी कई कविताएं उनकी लोकप्रिय उज़्बेक लोक गीत बन गए। अक्टूबर 2005 में, पाकिस्तान ने उनके सम्मान में उनके नाम से बाबुर क्रूज मिसाइल विकसित की थी।