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शाहजहाँ- (1627-1657 ई.)

  • शाहजहां के शासनकाल को स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है।
  •  उसने पुर्तगालियों के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने  के उद्देश्य से 1632 ई में पुर्तगालियों से युद्ध. किया एवं हुगली पर अधिकार कर लिया।
  •  उसने दिल्ली में एक महाविद्यालय का निर्माण एवं दारुल बका  नमक महाविद्यालय की मरम्मत करवाई।
  • मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां ने ही करवाया था।
  • अपनी बेगम मुमताजमहल की याद में शाहजहां ने आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया।
  • शाहजहां द्वारा बनवाई गई प्रमुख इमारतें हैं- दिल्ली का लाल किला, दिल्ली की जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद आदि।
  • शाहजहाँ का इतिहास – History Of Shahjahan

  • अपने पराक्रमो से आदिलशाह और निजामशाह के प्रस्थापित वर्चस्वो को मु तोड़ जवाब देकर सफलता मिलाने वाला राजा के रूप में शाहजहाँ की पहचान होती है। वैसेही खुदकी रसिकता को जपते हुये कलाकारों के गुणों को प्रोत्साहन देने वाला और ताजमहल जैसी अप्रतिम वास्तु खड़ी करने वाला ये राजा था।

    पारसी भाषा, वाड़:मय, इतिहास, वैदिकशास्त्र, राज्यशास्त्र, भूगोल, धर्म, युद्ध और राज्यकारभार की शिक्षा शहाजहान उर्फ राजपुत्र खुर्रम इनको मिली। इ.स. 1612 में अर्जुमंद बानू बेगम उर्फ मुमताज़ महल इनके साथ विवाह हुवा। उनके विवाह का उन्हें राजकारण में बहोत उपयोग हुवा।

    शाहजहाँ बहोत पराक्रमी थे। आदिलशहा, कुतुबशहा ये दोनों भी उनके शरण आये। निजामशाह की तरफ से अकेले शहाजी भोसले ने शाहजहाँ से संघर्ष किया। लेकिन शहाजहान के बहोत आक्रमण के वजह से शहाजी भोसले हारकर निजामशाही खतम हुयी। भारत के दुश्मन कम हो जाने के बाद शहाजहान की नजर मध्य आशिया के समरकंद के तरफ गयी। लेकिन 1639-48 इस समय में बहोत खर्चा करके भी वो समरकंद पर जीत हासिल कर नहीं सके।

    विजापुर और गोवळ कोंडा इन दो राज्यों को काबू में लेकर उसमे सुन्नी पथो का प्रसार करने के लिये औरंगजेब को चुना गया। पर औरंगजेब ने खुद के भाई की हत्या कर के बिमार हुये शाहजहाँ को कैद खाने में डाल दिया। वही जनवरी 1666 में उनकी दुर्देवी मौत हुयी।

    शाहजहाँ का नाम ‘ताजमहल’ इस अप्रतिम कलाकृति के वजह से भी यादो में रहता है। मुमताज़ महल इस अपनी बेगम के यादो में उन्होंने ये वास्तु बनवायी थी। उस समय इस वास्तु को बनवाने के लिये छे करोड़ रुपये खर्च आया।

    संगमवर के पत्थरों का इस्तेमाल ही शहाजहान निर्मित इस भव्य ईमारत की खासीयत है। इसके लिये उन्होंने इटालियन Techniques की भी मदत ली। मोती मस्जिद, दिल्ली का लाल किला ये भी उन्होंने बनवाई हुयी वास्तु है। ताजमहल इस सुंदर ख्वाब के तरफ देखते हुये उन्होंने अपनी आखरी सॉस ली।

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पूरा नामअल् आजाद अबुल मुजफ्फर शाहब उद-दीन मोहम्मद
जन्म ५ जनवरी १५९२
जन्मस्थानखुर्रम, लाहौर, पाकिस्तान
पिताजहाँगीर
माताताज बीबी बिलक़िस मकानी
विवाह अरजुमंद बानू बेगम उर्फ मुमताज महल इनके साथ विवाह और भी कन्दाहरी बेग़म अकबराबादी महल, हसीना बेगम, मुति बेगम, कुदसियाँ बेगम, फतेहपुरी महल, सरहिंदी बेगम, श्रीमती मनभाविथी इनके साथ.
सन्तानपुरहुनार बेगम, जहांआरा बेगम, दारा शिकोह, शाह शुजा, रोशनारा बेगम, औरंग़ज़ेब, मुराद बख्श, गौहरा बेगम