मौर्यान्‍तर काल

वंश  कालप्रमुख शासक
शुंगवंश185 ई.पू.- 73ई.पू.पुष्‍यमित्र शुग (पहला) अग्निमित्र,वसुमित्र,देवभूति-(अंतिम)
कण्‍ववंश73 ई.पू.-28ई.पू.वासुदेव कण्‍व (पहला) भूमिमित्र, सुशर्मा कण्‍व(अंतिम)

              अन्‍य वंश :-

मौर्यान्‍तर काल-

वंश  कालप्रमुख शासक
शुंगवंश185 ई.पू.- 73ई.पू.पुष्‍यमित्र शुग (पहला) अग्निमित्र,वसुमित्र,देवभूति-(अंतिम)
कण्‍ववंश73 ई.पू.-28ई.पू.वासुदेव कण्‍व (पहला) भूमिमित्र, सुशर्मा कण्‍व(अंतिम)

              अन्‍य वंश :-

आन्‍ध्र सातवाहन28ई.पू.-240ई. सिमुक(पहला)कृष्‍ण शातकर्णी प्रथम गौतमी पुत्रशात कर्णी युलामी चतुर्थ (अंतिम)


विदेशी वंश-

इण्‍डो ग्रीक (वैक्ट्रियन ग्रीक हिन्‍दवन )220ई.पू.- 120ई.पू.डिमेट्रियस,मिनेण्‍डर
सीथियन (शक)165-150 ई.रुद्रादमन (130-150ई.
पार्थियन(पहलव)पहली शताब्‍दी ई.गोन्‍दोफर्नीस (20-41ई.)
यु-ची(कुषाण)पहली दुसरी शताब्‍दी कुजल कडफिसिस,विमकडफिसिस, कनिष्‍क


गुप्‍तकाल (319ई.- 500ई.)

गुप्‍त   वंश
  चन्‍द्रगुप्‍त प्रथम   319-335ई.
समुन्‍द्रगुप्‍त  335-375ई.
रामगुप्‍त   375-380ई.
चन्‍दगुप्‍त व्दितीय चन्‍द्रगुप्‍त विक्रमादित्‍य) 380-414ई.
कुमार गुप्‍त414-455ई.
स्‍कन्‍द गुप्‍त  455-467ई.
पुर गुप्‍त467-476ई.
विष्‍णु गुप्‍त  926-550ई..(अंतिम)


गुप्‍तकालीन मंदिर

मंदिर स्‍थल      देवता
भुमरा नागोद(राजस्‍थान)    शिव
नचनाकुठारपन्‍ना(सतना)(म.प्र )  पार्वती
ऐरण  सागर(म.प्र.  )    विष्‍णु
देवगड  ललितपुर (झासी)उ.प्र. दशावतार
तिंरवा जबलपुर(म.प्र)   विष्‍णु
भीतरगांव ईटो का बनाकानपुर(उ.प्र.)        लक्ष्‍मण


गुप्‍तकालीन चित्रकला

चित्रकला के 3रुप पाये जाते है-

  1. अलंकरण- फूल,पत्‍ती,पक्षी,वनस्‍‍पति,पशु।
  2. चित्रण- बुध्‍द व बोधिसत्‍व के चित्र बनते थें।
  3. वर्णन- जातक कथाओ का वर्णन।

चित्रकला मे दो शैलियां प्रसिध्‍द है-

1.टेम्‍परा शैली- दीवार पर गीला प्‍लास्‍टर लगाकर अंकन करने के बाद उधेड देतें थें।

  1. फ्रेस्‍को शैली- मिट्टी का चूर्ण, अण्‍डे की जर्दी व छिल्‍के को मिलाकर घोल तैयार करते थे।

अजंता की गुफा न.16व 17गुप्‍त काल से सम्‍बन्धित है। गुफा न.16को मरणासन्‍न राजकुमारी की तथा गुफा न. 16 को चित्रशाला भी कहते है। इसमे बुध्‍द की जीवन की घटनाओ का चित्रण है । अजंता के चित्र महायान शाखा के है।

बाघ गुफा – यह ग्‍वालियर के निकट स्थित है । यह विन्‍ध्‍याचल पर्वत को काटकर बनाई गई है। इसमे कुल गुफाए है । संगीत व नृत्‍य के चित्र आकर्षण है।

‘पेरीप्‍लस आफ द इरैथ्रियन सी’ से भारत व रोम के बीच होने वाले व्‍यापार का पता चलता है । भारतीय मलमल की रोम में बडी मांग थी । निर्यात के बदले भारत को सोने व चांदी के सिक्‍के प्राप्‍त होते थे।

अरिकमैन्‍डू- दक्षित भारत मे स्थित रोमन बस्‍ती थी।

गुप्‍तकालीन अभिलेख


अभिलेख  शासक
प्रयाग प्रशस्ति, एरण प्रशस्तिसमुन्‍द्रगुप्‍त
महरौली लौह स्‍तंभ,सांची शिलालेख गढवा,शिलालेख(प्रथम) चंन्‍द्रगुप्‍त व्दितीय
मंदसौर,गढवा शिलालेख(व्दितीय),बिलसड स्‍तंभ लेखकुमार गुप्‍त
भितरी तथा सुपिया स्‍तंभ लेख,जुनागढ प्रशस्ति स्‍कंद गुप्‍त
  •                                                        गुप्‍तोत्‍तरकाल
    पुष्‍यभूति वंशछठी शताब्‍दीप्रभाकर वर्धन, राजवर्धन, हर्षवर्धन(606-647ई.)
    मौखरि वंश छठी शताब्‍दी  गृहवर्मान, हर्षवर्धन
    उत्‍तर दक्षिण भारत (वंश)
    वंश  संस्‍थापक राजधानी
    पल्‍लव सिह विष्‍णु    कांची (तमिलनाडू)
    वातापी के चालुक्‍यजय सिंह      बातापी(महाराष्‍ट्र)
    कल्‍याणी के चालुक्‍यतैलप व्दितीय  कल्‍याणी (महाराष्‍ट्र )
    वैंगी चालुक्‍य   विष्‍णुवर्धन  वैंगी (महाराष्‍ट्र )
    राष्‍ट्रकुट दन्तिदुर्ग मान्‍यखेत(महाराष्‍ट्र )
    पालगोपाल      मुगेर(बिहार)
    गुर्जर-प्रतिहारहरिचन्‍द्र         कन्‍नौज(उ.प्र.)
    गंग       वजृहस्‍त्र     

    पुरी(ओडिशा)

    परमारकृष्‍णराज        

    धारा(म.प्र.)

    सोलंकी  मूलराज  

    अन्हिलावाड(गुजरात)

    चोल विजयालय  

    तंजाबुर(तमिलनाडु )

      प्राचीन काल के प्रमुख स्‍तूप

पिपहरवासबसे प्राचीन बस्‍ती,जिला उत्‍तर प्रदेश में।
भरहुतमध्‍य प्रदेश के सतना में।
सांचीअशोक व्दारा निर्मीत मध्‍यप्रदेश के रायसेन में ।
बोधगयाबिहार में बोधगया में अशोक व्दारा निर्मीत
अमरावतीआंध्र प्रदेश के गुन्‍टुर के कृष्‍णा नदी के किनारे । इसमे संगमरमर का प्रयोग किया जाता है।
नागार्जुन कोण्‍डाआंध्र प्रदेश के गुण्‍टुर मे ।
सारनाथसारनाथ मे अशोक के व्दारा ।
नालंदाबिहार मे नालंदा मे अशोक व्दारा 


         मुख प्राचीन गुफाए

बराबर गुफाएंबिहार मे गया मे अशोक व्दारा बराबर पहाडी पर।
अजन्‍तामहाराष्‍ट्र के औरगांबाद जिले मे अजन्‍ता नामक स्‍थान पर । इनमे चित्र मुख्‍य रुप से बौध्‍द धर्म से सम्‍बधित है । इनका निर्माण गुप्‍त काल मे ही पुर्ण हुआ था।
एलोरामहाराष्‍ट्र के औरंगाबाद जिले मे स्थित है इसमे मुर्तियां है । इसमे राष्‍ट्रकुट शासक कृष्‍ण प्रथम द्वारा निर्मीत कैलाशनाथ मंदिर प्रसिध्‍द है।
कार्लेमहाराष्‍ट्र के कार्ले मे पहली शताब्‍दी ईसा पूर्व की गुफाए है जीनमे बौध्‍दकालीन चैतय हे ।
एलीफेटामुंबई मे एलिफेटा नामक स्‍थान पर ।
बाघ गुफाएग्‍वालियर के पास बाघ मे 5वी-6ठवीं श्‍ताब्‍दी की गुफाएं है

मौर्योत्‍तर काल (साहित्‍य)

ग्रंथ का नाम लेखक
अष्‍टाध्‍यायीपाणिनी
सत्‍सहस्त्रिका सुत्रनागार्जुन
बुध्‍द चरित, शरिपुत्र प्रकरणम, सुत्रालंकार, सौन्‍दरानंद काव्‍यअश्‍वघोष
महाभाष्‍यपतंजलि
नागानंदहर्षवर्धन
हर्षचरित, कादंबरीबाणभट्ट
कर्पूरमंजरी,काव्‍यमीमांसाराजशेखर
सूर्य सिध्‍दांतआर्यभट्ट
वृहज्‍जातिकावराहमिहिर
मालती माधवदामोदर गुप्‍त
सिध्‍दांत शिरोमणि,लीलावती भास्‍कराचार्य
मत्‍तविलास प्रहसन महेन्‍द्र वर्मन
मुद्राराक्षस, देवीचंद्रगुप्‍तम्विशाख्‍दत्‍त
स्‍वप्‍नवासवदत्‍ता तथा चारुदत्‍तमभास
मृच्‍छकटिकम् शुद्रक
पंचतंत्रविष्‍णुशर्मा
गीत गोविन्‍दजयदेव
नाट्य शास्‍त्रभरतमुनि
अभिज्ञान शाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम्, मेघदुतम्कालिदास
अर्थशास्‍त्रविष्‍णुगुप्‍त (कौटिल्‍य )
इंडिकामेगस्‍थनीज

   विभिन्‍न साहित्यिक रचनाएं (काव्‍य)

रचयिता   साहित्यिक ग्रंथ
भारविकिरातार्जुनीयम्
भट्टिभट्टिकाव्‍य या रावण वध
माघशिशुपाल वध
क्षेमेन्‍द्रवृहत्‍कथामंजरी, दशावतारचरित, कलाविलास
विल्‍हणविक्रमांकदेवचरित
कल्‍हणराजतरंगिणी
बल्‍लालभोज प्रबंध
जयानकपृथ्‍वीराज विजय
सोमेश्‍वरकीर्तिकौमुदी
अमर सिंहअमरकोष
वात्‍स्‍यायनकामसूत्र
जयसिंह सूरि हम्‍मीर-मदमर्दन
मेरुतुंग प्रबंधचिन्‍तामणि
दण्‍डीदसकुमार चरित
पिंगलपिंगलसुत्र

        नाटक

भवभूतिमालती माधव, महावीर चरित, उत्‍तर रामचरित
राजशेखरबाल रामायण, कर्पूरमन्‍जरी

वैज्ञानिक साहित्‍य

वल्‍लभाचार्यन्‍याय लीलावती
  


 धार्मिक

विज्ञानेश्‍वर  मिताक्षरा

       

प्राचीन भारत के यात्री

यात्रीशासक  काल
मेगस्‍थनीजचन्‍द्रगुप्‍त मौर्य305ई.पूर्व
फाह्यानचन्‍द्रगुप्‍म व्दितीय399-414ई.
ह्वेन सांग (यात्रियो का राजकुमार )हर्षबर्धन639-643ई.

           प्राचीन भारत के प्रमुख एतिहासिक स्‍थान

स्‍थान विशेषतायें/वर्तमान स्थिति
इनामगांववर्तमान पश्चिमी महाराष्‍ट्र मे पदभणी तथा पुणे के बीच में है ।
अहारदक्षिणी-पूर्व राजस्‍थान मे है।
नेवदा टोलीमध्‍य प्रदेश मे नर्मदा नदी किनारे इंदौर के पास है ।
कायथमध्‍य प्रदेश मे उज्‍जैन जिले मे है ।
 बागोरराजस्‍थान मे है ।
बुर्जहोमजम्‍मू-कश्‍मीर मे श्रीनगर मे 16किमी की दुरी पर स्थित है ।
बाघमध्‍य प्रदेश के धार जिेले मे है ।
भीमबेटकामध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले मे है।
दैमाबादमहाराष्‍ट्र मे अहमदनगर के पास है ।
सरायनाहरवर्तमान उत्‍तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले मे है
मेहरगढवर्तमान पाकिस्‍तान के बलुचिस्‍तान में है।
आमरीपाकिस्‍तान के सिन्‍ध प्रांत मे है।
कालीबांगराजस्‍थान मे है ।
आलमगीरपुरवर्तमान उत्‍तर प्रदेश मे मेरठ के पास है ।
बणवालीहरियाणा के हिसार जिले मे है।
चान्‍हुदडोवर्तमान पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत मे है ।
लोथलगुजरात में काठियावाड क्षेत्र मे खंभात की खाडी के उपर स्थित है ।
मांडाजम्‍मू मे अखनूर के पास है ।
सुरतकोटदा गुजरात के कच्‍छ जिले मे है ।
रंगपुरगुजरात के कच्‍छ जिले मे है ।
सुतर्कागेडोरमकरान तट पर है ।
कनिष्‍कपुरआधुनिक कश्‍मीर घाटी मे है ।
कन्‍नौज‘कन्‍यकुब्‍ज’ या ‘महोदयश्री’ के नाम से प्रसिध्‍द यह स्‍थान वर्तमान उ.प्र. के फरुखाबाद जिले मे है।
एरणमध्‍य प्रदेश के सागर जिले में हैं।
उद्भाण्‍डपुरयह वर्तमान पाकिस्‍तान या ओहिन्‍द था।
अतरंजीखेडाउत्‍तर प्रदेश मे एटा जिले मे है ।
तक्षशिलापाकिस्‍तान के रावतपिंडी में है ।
कुशीनगरकुशीनगर या कुशीनारा उत्‍तर प्रदेश के देवरिया जिलने मे है ।
कपिलवस्‍तुयह उत्‍तर प्रदेश के बस्‍ती जिले का पिप‍हरवा नामक स्‍थान था।
काम्पिल्‍यउत्‍तर प्रदेश के बदायुं और फर्रुखाबाद के बीच में है ।
शहेश्‍वर/महिष्‍मतीइसकी पहचान मध्‍य प्रदेश के इंदौर जिले के आधुनिक मांधाता से कि गयी है ।
भगवानपुरवर्तमान हरियाणा राज्‍य के कुरुक्षेंत्र जिले मे है।
भितरगांवउत्‍तर प्रदेश के कानपुर जिले मे है ।
बांसखेडाउत्‍तर प्रदेश शाहजहांपुर जिले मे है ।
थानेश्‍वरहरियाणा के करनाल जिले मे है ।
उरैयूरवर्तमान तमिलनाडू के तिरुचिरापल्‍ली जिले मे है ।
वल्‍लभीगुजरात के भावनगर जिले मे बालाघाट गांव ही वल्‍लभी था ।
व्दारिकागुजरात राज्‍य में काठियावाड मे था।
कावेरिपटनम् वर्तमान तमिलनाडू के तंजौर जिले मे है।
कांचीपुरमतमिलनाडू के जूनागढ जिले मे एक पर्वतीय क्षेत्र है ।
गिरनारगुजरात के जूनागढ जिले मे एक पर्वतीय क्षेत्र है ।
सूर्पारकयह आधुनिक सोपारा है। जो महाराष्‍ट्र के थाणे जिले मे है ।
बादामीआधुनिक कर्नाटक के बीजापुर जिले में है ।
सितन्‍नावसालतमिलनाडू के तंजौर जिले में है।
कौण्‍डनपुरमहाराष्‍ट्र के अमरावती जिले मे है ।
बैराटराजस्‍थान में जयपुर से 42मील दूर उत्‍तर-पूर्व मे है ।

> आन्‍ध्र सातवाहन 28ई.पू.-240ई. सिमुक (पहला)कृष्‍ण शातकर्णी प्रथम गौतमी पुत्रशात कर्णी युलामी चतुर्थ (अंतिम)


विदेशी वंश-

इण्‍डो ग्रीक (वैक्ट्रियन ग्रीक हिन्‍दवन )220ई.पू.- 120ई.पू.डिमेट्रियस,मिनेण्‍डर
सीथियन (शक)165-150 ई.रुद्रादमन (130-150ई.
पार्थियन(पहलव)पहली शताब्‍दी ई.गोन्‍दोफर्नीस (20-41ई.)
यु-ची(कुषाण)पहली दुसरी शताब्‍दी कुजल कडफिसिस,विमकडफिसिस, कनिष्‍क


गुप्‍तकाल (319ई.- 500ई.)

गुप्‍त   वंश
  चन्‍द्रगुप्‍त प्रथम   319-335ई.
समुन्‍द्रगुप्‍त  335-375ई.
रामगुप्‍त   375-380ई.
चन्‍दगुप्‍त व्दितीय चन्‍द्रगुप्‍त विक्रमादित्‍य) 380-414ई.
कुमार गुप्‍त414-455ई.
स्‍कन्‍द गुप्‍त  455-467ई.
पुर गुप्‍त467-476ई.
विष्‍णु गुप्‍त  926-550ई..(अंतिम)


गुप्‍तकालीन मंदिर

मंदिर स्‍थल      देवता
भुमरा नागोद(राजस्‍थान)    शिव
नचनाकुठारपन्‍ना(सतना)(म.प्र )  पार्वती
ऐरण  सागर(म.प्र.  )    विष्‍णु
देवगड  ललितपुर (झासी)उ.प्र. दशावतार
तिंरवा जबलपुर(म.प्र)   विष्‍णु
भीतरगांव ईटो का बनाकानपुर(उ.प्र.)        लक्ष्‍मण


गुप्‍तकालीन चित्रकला

चित्रकला के 3रुप पाये जाते है-

  1. अलंकरण- फूल,पत्‍ती,पक्षी,वनस्‍‍पति,पशु।
  2. चित्रण- बुध्‍द व बोधिसत्‍व के चित्र बनते थें।
  3. वर्णन- जातक कथाओ का वर्णन।

चित्रकला मे दो शैलियां प्रसिध्‍द है-

1.टेम्‍परा शैली- दीवार पर गीला प्‍लास्‍टर लगाकर अंकन करने के बाद उधेड देतें थें।

  1. फ्रेस्‍को शैली- मिट्टी का चूर्ण, अण्‍डे की जर्दी व छिल्‍के को मिलाकर घोल तैयार करते थे।

अजंता की गुफा न.16व 17गुप्‍त काल से सम्‍बन्धित है। गुफा न.16को मरणासन्‍न राजकुमारी की तथा गुफा न. 16 को चित्रशाला भी कहते है। इसमे बुध्‍द की जीवन की घटनाओ का चित्रण है । अजंता के चित्र महायान शाखा के है।

बाघ गुफा – यह ग्‍वालियर के निकट स्थित है । यह विन्‍ध्‍याचल पर्वत को काटकर बनाई गई है। इसमे कुल गुफाए है । संगीत व नृत्‍य के चित्र आकर्षण है।

‘पेरीप्‍लस आफ द इरैथ्रियन सी’ से भारत व रोम के बीच होने वाले व्‍यापार का पता चलता है । भारतीय मलमल की रोम में बडी मांग थी । निर्यात के बदले भारत को सोने व चांदी के सिक्‍के प्राप्‍त होते थे।

अरिकमैन्‍डू- दक्षित भारत मे स्थित रोमन बस्‍ती थी।

गुप्‍तकालीन अभिलेख

अभिलेख  शासक
प्रयाग प्रशस्ति, एरण प्रशस्तिसमुन्‍द्रगुप्‍त
महरौली लौह स्‍तंभ,सांची शिलालेख गढवा,शिलालेख(प्रथम) चंन्‍द्रगुप्‍त व्दितीय
मंदसौर,गढवा शिलालेख(व्दितीय),बिलसड स्‍तंभ लेखकुमार गुप्‍त
भितरी तथा सुपिया स्‍तंभ लेख,जुनागढ प्रशस्ति स्‍कंद गुप्‍त
  •                                                        गुप्‍तोत्‍तरकाल
    पुष्‍यभूति वंशछठी शताब्‍दीप्रभाकर वर्धन, राजवर्धन, हर्षवर्धन(606-647ई.)
    मौखरि वंश छठी शताब्‍दी  गृहवर्मान, हर्षवर्धन
    उत्‍तर दक्षिण भारत (वंश)
    वंश  संस्‍थापक राजधानी
    पल्‍लव सिह विष्‍णु    कांची (तमिलनाडू)
    वातापी के चालुक्‍यजय सिंह      बातापी(महाराष्‍ट्र)
    कल्‍याणी के चालुक्‍यतैलप व्दितीय  कल्‍याणी (महाराष्‍ट्र )
    वैंगी चालुक्‍य   विष्‍णुवर्धन  वैंगी (महाराष्‍ट्र )
    राष्‍ट्रकुट दन्तिदुर्ग मान्‍यखेत(महाराष्‍ट्र )
    पालगोपाल      मुगेर(बिहार)
    गुर्जर-प्रतिहारहरिचन्‍द्र         कन्‍नौज(उ.प्र.)
    गंग       वजृहस्‍त्र     

    पुरी(ओडिशा)

    परमारकृष्‍णराज        

    धारा(म.प्र.)

    सोलंकी  मूलराज  

    अन्हिलावाड(गुजरात)

    चोल विजयालय  

    तंजाबुर(तमिलनाडु )

      प्राचीन काल के प्रमुख स्‍तूप

पिपहरवासबसे प्राचीन बस्‍ती,जिला उत्‍तर प्रदेश में।
भरहुतमध्‍य प्रदेश के सतना में।
सांचीअशोक व्दारा निर्मीत मध्‍यप्रदेश के रायसेन में ।
बोधगयाबिहार में बोधगया में अशोक व्दारा निर्मीत
अमरावतीआंध्र प्रदेश के गुन्‍टुर के कृष्‍णा नदी के किनारे । इसमे संगमरमर का प्रयोग किया जाता है।
नागार्जुन कोण्‍डाआंध्र प्रदेश के गुण्‍टुर मे ।
सारनाथसारनाथ मे अशोक के व्दारा ।
नालंदाबिहार मे नालंदा मे अशोक व्दारा 


         मुख प्राचीन गुफाए

बराबर गुफाएंबिहार मे गया मे अशोक व्दारा बराबर पहाडी पर।
अजन्‍तामहाराष्‍ट्र के औरगांबाद जिले मे अजन्‍ता नामक स्‍थान पर । इनमे चित्र मुख्‍य रुप से बौध्‍द धर्म से सम्‍बधित है । इनका निर्माण गुप्‍त काल मे ही पुर्ण हुआ था।
एलोरामहाराष्‍ट्र के औरंगाबाद जिले मे स्थित है इसमे मुर्तियां है । इसमे राष्‍ट्रकुट शासक कृष्‍ण प्रथम द्वारा निर्मीत कैलाशनाथ मंदिर प्रसिध्‍द है।
कार्लेमहाराष्‍ट्र के कार्ले मे पहली शताब्‍दी ईसा पूर्व की गुफाए है जीनमे बौध्‍दकालीन चैतय हे ।
एलीफेटामुंबई मे एलिफेटा नामक स्‍थान पर ।
बाघ गुफाएग्‍वालियर के पास बाघ मे 5वी-6ठवीं श्‍ताब्‍दी की गुफाएं है

मौर्योत्‍तर काल (साहित्‍य)

ग्रंथ का नाम लेखक
अष्‍टाध्‍यायीपाणिनी
सत्‍सहस्त्रिका सुत्रनागार्जुन
बुध्‍द चरित, शरिपुत्र प्रकरणम, सुत्रालंकार, सौन्‍दरानंद काव्‍यअश्‍वघोष
महाभाष्‍यपतंजलि
नागानंदहर्षवर्धन
हर्षचरित, कादंबरीबाणभट्ट
कर्पूरमंजरी,काव्‍यमीमांसाराजशेखर
सूर्य सिध्‍दांतआर्यभट्ट
वृहज्‍जातिकावराहमिहिर
मालती माधवदामोदर गुप्‍त
सिध्‍दांत शिरोमणि,लीलावती भास्‍कराचार्य
मत्‍तविलास प्रहसन महेन्‍द्र वर्मन
मुद्राराक्षस, देवीचंद्रगुप्‍तम्विशाख्‍दत्‍त
स्‍वप्‍नवासवदत्‍ता तथा चारुदत्‍तमभास
मृच्‍छकटिकम् शुद्रक
पंचतंत्रविष्‍णुशर्मा
गीत गोविन्‍दजयदेव
नाट्य शास्‍त्रभरतमुनि
अभिज्ञान शाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम्, मेघदुतम्कालिदास
अर्थशास्‍त्रविष्‍णुगुप्‍त (कौटिल्‍य )
इंडिकामेगस्‍थनीज

   विभिन्‍न साहित्यिक रचनाएं (काव्‍य)

रचयिता   साहित्यिक ग्रंथ
भारविकिरातार्जुनीयम्
भट्टिभट्टिकाव्‍य या रावण वध
माघशिशुपाल वध
क्षेमेन्‍द्रवृहत्‍कथामंजरी, दशावतारचरित, कलाविलास
विल्‍हणविक्रमांकदेवचरित
कल्‍हणराजतरंगिणी
बल्‍लालभोज प्रबंध
जयानकपृथ्‍वीराज विजय
सोमेश्‍वरकीर्तिकौमुदी
अमर सिंहअमरकोष
वात्‍स्‍यायनकामसूत्र
जयसिंह सूरि हम्‍मीर-मदमर्दन
मेरुतुंग प्रबंधचिन्‍तामणि
दण्‍डीदसकुमार चरित
पिंगलपिंगलसुत्र

        नाटक

भवभूतिमालती माधव, महावीर चरित, उत्‍तर रामचरित
राजशेखरबाल रामायण, कर्पूरमन्‍जरी

वैज्ञानिक साहित्‍य

वल्‍लभाचार्यन्‍याय लीलावती
  


 धार्मिक

विज्ञानेश्‍वर  मिताक्षरा

       

प्राचीन भारत के यात्री

यात्रीशासक  काल
मेगस्‍थनीजचन्‍द्रगुप्‍त मौर्य305ई.पूर्व
फाह्यानचन्‍द्रगुप्‍म व्दितीय399-414ई.
ह्वेन सांग (यात्रियो का राजकुमार )हर्षबर्धन639-643ई.

           प्राचीन भारत के प्रमुख एतिहासिक स्‍थान

स्‍थान विशेषतायें/वर्तमान स्थिति
इनामगांववर्तमान पश्चिमी महाराष्‍ट्र मे पदभणी तथा पुणे के बीच में है ।
अहारदक्षिणी-पूर्व राजस्‍थान मे है।
नेवदा टोलीमध्‍य प्रदेश मे नर्मदा नदी किनारे इंदौर के पास है ।
कायथमध्‍य प्रदेश मे उज्‍जैन जिले मे है ।
 बागोरराजस्‍थान मे है ।
बुर्जहोमजम्‍मू-कश्‍मीर मे श्रीनगर मे 16किमी की दुरी पर स्थित है ।
बाघमध्‍य प्रदेश के धार जिेले मे है ।
भीमबेटकामध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले मे है।
दैमाबादमहाराष्‍ट्र मे अहमदनगर के पास है ।
सरायनाहरवर्तमान उत्‍तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले मे है
मेहरगढवर्तमान पाकिस्‍तान के बलुचिस्‍तान में है।
आमरीपाकिस्‍तान के सिन्‍ध प्रांत मे है।
कालीबांगराजस्‍थान मे है ।
आलमगीरपुरवर्तमान उत्‍तर प्रदेश मे मेरठ के पास है ।
बणवालीहरियाणा के हिसार जिले मे है।
चान्‍हुदडोवर्तमान पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत मे है ।
लोथलगुजरात में काठियावाड क्षेत्र मे खंभात की खाडी के उपर स्थित है ।
मांडाजम्‍मू मे अखनूर के पास है ।
सुरतकोटदा गुजरात के कच्‍छ जिले मे है ।
रंगपुरगुजरात के कच्‍छ जिले मे है ।
सुतर्कागेडोरमकरान तट पर है ।
कनिष्‍कपुरआधुनिक कश्‍मीर घाटी मे है ।
कन्‍नौज‘कन्‍यकुब्‍ज’ या ‘महोदयश्री’ के नाम से प्रसिध्‍द यह स्‍थान वर्तमान उ.प्र. के फरुखाबाद जिले मे है।
एरणमध्‍य प्रदेश के सागर जिले में हैं।
उद्भाण्‍डपुरयह वर्तमान पाकिस्‍तान या ओहिन्‍द था।
अतरंजीखेडाउत्‍तर प्रदेश मे एटा जिले मे है ।
तक्षशिलापाकिस्‍तान के रावतपिंडी में है ।
कुशीनगरकुशीनगर या कुशीनारा उत्‍तर प्रदेश के देवरिया जिलने मे है ।
कपिलवस्‍तुयह उत्‍तर प्रदेश के बस्‍ती जिले का पिप‍हरवा नामक स्‍थान था।
काम्पिल्‍यउत्‍तर प्रदेश के बदायुं और फर्रुखाबाद के बीच में है ।
शहेश्‍वर/महिष्‍मतीइसकी पहचान मध्‍य प्रदेश के इंदौर जिले के आधुनिक मांधाता से कि गयी है ।
भगवानपुरवर्तमान हरियाणा राज्‍य के कुरुक्षेंत्र जिले मे है।
भितरगांवउत्‍तर प्रदेश के कानपुर जिले मे है ।
बांसखेडाउत्‍तर प्रदेश शाहजहांपुर जिले मे है ।
थानेश्‍वरहरियाणा के करनाल जिले मे है ।
उरैयूरवर्तमान तमिलनाडू के तिरुचिरापल्‍ली जिले मे है ।
वल्‍लभीगुजरात के भावनगर जिले मे बालाघाट गांव ही वल्‍लभी था ।
व्दारिकागुजरात राज्‍य में काठियावाड मे था।
कावेरिपटनम् वर्तमान तमिलनाडू के तंजौर जिले मे है।
कांचीपुरमतमिलनाडू के जूनागढ जिले मे एक पर्वतीय क्षेत्र है ।
गिरनारगुजरात के जूनागढ जिले मे एक पर्वतीय क्षेत्र है ।
सूर्पारकयह आधुनिक सोपारा है। जो महाराष्‍ट्र के थाणे जिले मे है ।
बादामीआधुनिक कर्नाटक के बीजापुर जिले में है ।
सितन्‍नावसालतमिलनाडू के तंजौर जिले में है।
कौण्‍डनपुरमहाराष्‍ट्र के अमरावती जिले मे है ।
बैराटराजस्‍थान में जयपुर से 42मील दूर उत्‍तर-पूर्व मे है ।

















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Post On 2021-10-22