मुग़ल साम्राज्य का रोचक इतिहास

मुगल वंश (1526-1540तथा 1555-1707)

  • बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 ई. को ट्रांसऑक्सियाना के एक छोटे से राज्य फरगना में हुआ। इसका पुरा नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था। इसके पिता का नाम उमर शेख मिर्जा(तैमूर वंश) तथा माता का नाम कुतलुग निगार खानम (चंगेज खान के वंशज) था। वह कृष्णदेव राय व नुसरत शाह का मसकालिन था।

  • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुके- बाबरी तुर्की भाषा में लिखी थी।

  • 1494 ई.में 12 वर्ष की अल्पायु में बाबर ट्रांस व ऑक्सियाना फरगना नामक एक छोटे से राज्य की गद्दी पर बैठा।

  • मध्य एशिया के अन्य संख्यक आक्रमणकारियों की तरह बाबर भी भारत के धन-ध्यान की ख्याति सुनकर उसकी ओर आकृष्ट हुआ था।

  • उसने सुन रखा था कि भारत सोने चांदी का देश है। तैमूर यहां से अतुलित संपत्ति एवं कुशल कारीगर लेकर लौटा था, जिसकी बदौलतजिसकी बदौलत उसने अपने एशियाई साम्राज्य को सुदृढ़ता प्रदान की थी तथा अपनी राजधानी को भव्य बनाया था, साथ ही उसने पंजाब के कुछ इलाकों को अपने साम्राज्य में भी मिला लिया था।

  • बाबर की भारत-विजय की आकांक्षा का एक और भी कारण यह था कि उसे काबुल से बहुत कम आमदनी होती थी।

  • उत्तर पश्चिम भारत की राजनीतिक परिस्थिति भारत में बाबर के प्रवेश के लिए उपयुक्त थी। 1570 ई. मे सिकंदर लोदी की मृत्यु हो चुकी थी तथा दिल्ली की गद्दी पर इब्राहिम लोदी आसीन था।

  • अफगान सरदारों में एक सबसे दुर्धर्ष व्यक्ति पंजाब का सूबेदार दौलत खान लोदी था। दौलत खान पंजाब का लगभग स्वतंत्र शासक था।

  • 1518-19 ईण् में बाबर ने भेरा के शक्तिशाली दुर्ग को जीत लिया। जब बाबर काबुल लौटा तो दौलत खाॅं ने उसके प्रतिनिधि को भेरा से निकाल दिया।

  • 1520-21 ई. में बाबर ने एक बार फिर सिंधु नदी पार कर आसानी से भेरा और सियालकोट को जीत लिया।

जहीरुद्दीन बाबर
1526-1530 ई.
हूमायॅू
1530-1540 ई. तथा 1555-1556 ई.
1556-1605 ई.
जहांगीर
1605-1627 ई.
शाहजहॉ
1627-1658 ई.
औरंगजेब
1658-1707 ई.


सूरवंश (1540-1555ई.)


1540-1545 ई.
इस्‍लाम शाह
1545-1553 ई.
आदिल शाह
1553-1555 ई.

शेरशाह का प्रशासन

शेरशाह ने अलाउद्दीन खिलजी की शासन पद्धति के आधार पर अफगान राज्‍य की स्‍थापना की। इसके काल मे पॉच प्रमुख विभाग थे

दीवान-ए-विजारत
भू-राजस्‍व
दीवान-ए-आरिज
सैन्‍यविभाग
दीवान-ए-रिसालत
धार्मिक
दीवान-ए-कजा
न्‍याय

अकबर

अकबरने 1579 में महजर का पाठ किया बाबर, हुमायॅू, तहॉगीर जिसे फैजी ने तैयार किया था। महजर की घोषणा के बाद अकबर ने सुल्‍तान-ए-आदिल की उपाधि धारण की।

उसने इबादतखाने मे जैन विद्वान जिनचन्‍द्र सूरी और हरिविजय सूरी से वाद-विवाद किया।
हरिविजय को जगतगुरु तथा जिनचन्‍द्र को युग प्रधान की उपाधि दी।

हरिविजय सूरी से प्रभावित होकर उसने पशु-पक्षियों के वध को प्रतिबंधित कर दिया। दस्‍तुरजी मेहरजी राणा पारसी विद्वान थें।

सर एण्‍टोन मानसरैत और फादर एकाविवा से भी अकबर का वाद-विवाद हुआ।

हिन्‍दू विद्वानो मे पुरुषोत्‍तम तथा देवी से भी वाद-विवाद हुआ। अकबर ने सिख गुरु रामदास को स्‍वर्ण मंदिर बनवाने के लिए 500बीघे जमीन दी।

अकबर ने विट्ठलनाथ को जैतपुर और गोकुल की जागीर दी।

अकबर ने 1582मे एकेश्‍वर वाद का समर्थन करते हुऐ तौहीद-ए-इलाही की स्‍थापना की

अकबर ने अबुल-फजल को इस धर्म का मुख्‍य पुरोहित बनाया तथा रविवार का दिन इस धर्म मे सामिल होने के लिए रखा।

बीरबल एक मात्र हिन्‍दू राजा थे जिन्‍होने इस धर्म को स्‍वीकार किया।

अकबर ने हीजरी सम्वत् सौर वर्ष के आधार पर शुरु वश्‍यावृत्ति मे लिप्‍त औरतों को शहर के बाहर शैतानपुर नामक बस्‍ती मे बसने को कहा। अकबर ने सुर्य की उपासना तथा चिश्‍ती सिलसिले मे गहरी आस्‍था जाहिर की। अकबर ने इलाही कलेंडर 1583 मे जारी किया।

अकबरकालीन युद्ध


वर्ष
युद्ध
शासक
1556
पानीपत का द्वितीय युद्ध
हेमू
1561तथा62
मालबा
बाज बहादुर
1562
आमेर
भारमल
1562
मेडता
जयमल
1564
गोडवाना
वीरनारायण दुर्गावती
1569
रणथम्‍भौर
सूरजन हाडा
1570
मारवाड
रावचन्‍द्र सेन
1574-76
बिहार तथा बंगाल
दाऊद खां
1576
हल्‍दीघाटी
राणा प्रताप
1581
काबुल
हकीम मिर्जा
1586
काश्‍मीर
युसुफ खां तथा याकूब खां
1591
सिंध
जानी बेग
1591
उडीसा
निसार खां
1595
बलूचिस्‍तान
पन्‍नी अफगन
1595
कन्‍धार
मुजफ्फर हुसैन
1599
दौलताबाद
चांदबीबी
1600
अहमदनगर
बहादुरशाह व चांदबीबी
1601
असीरगढ
मीरनबहादुर

अकबरकालीन प्रमुख निर्णय

दास प्रथा का अन्‍त
1562
तीर्थयात्रा कर की समाप्ति
1563
जजिया कर समाप्‍त
1564(1679इसे औरंगजेब ने पुन:लागू कर दिया।)
फतेहपुर सीकरी की स्‍थापना
1571
बुलन्‍द दरवाजा का निर्माण
1572
1575
मनसबदारी का आरंभ
1579
महजरनामा का प्रारंभ
1579
दीन-ए-इलाही की घोषणा
1582(इसे तौहीद-ए-इलाही भी कहा गया है)

मुगलकालीन मकबरे

शासक
मकबरा
निर्माता
काबुल (अफगानिस्‍तान)
हुमायूं
हुमायूं
दिल्‍ली
गुलवदन बेगम
अकबर
सिकन्‍दरा(आगरा)
जहांगीर
जहांगीर
लाहौर (पाकिस्‍तान)
नूरजहां
शाहजहां
आगरा (ताजमहल)
शाहजहां
औरंगजेब
दौलताबाद (औरगाबाद,महाराष्‍ट्र)

शेरशाह सूरी
सासाराम (बिहार,स्‍वयं द्वारा निर्मित)
शेरशाहसूरी


मुगलकालीन इमारतें


बाग/इमारत
स्‍थान
शासक
आरामबाग
आगरा
बाबर
शालीमार बाग
कश्‍मीर
जहॉगीर
पुराना किला
दिल्‍ली
शेहशाह
इलाहाबाद का किला
इलाहाबाद
अकबर
फतेहपुर सीकर मे जोधाबाई महल, पंच महल, मरीयम महल, बीरवल महल
आगरा
अकबर
एत्‍माछौला
फतेहपुर सीकरी
अकबर
दीवाने आम, दीवाने खास, मोती मस्जिद, खास महल
आगराकिला
नूरजहां
लाल किला
दिल्‍ली
शाहजहॉ
जामा मस्जिद
दिल्‍ली
शाहजहॉ
मोती मस्जिद
दिल्‍ली के लाल किले
औरंगजेब
बीवी का मकबरा
औरंगाबाद
औरंगजेब

मुगल कालीन चित्रकार

शासक
चित्रकार
विशेष/उपाधि
बाबर
जियहाक
--
हमायॅू
मीर सैयद अली अब्‍दुल समद
नादिर उलअर्श शीरी कलम
अकबर
दशवन्‍त बसावन केशव सावलदास ताराचन्‍द
राज्‍यनामा की चित्रकारी (सर्वश्रेष्‍ठ प्राकृतिक चित्रों का चित्रकार)
जहॉगीर
विसनदास अब्‍दुल हसन मुहम्‍मद नादिर मनोहर मंसूर
नादिर उल्‍जामा पक्षियों का चित्रका

मुगलकालीन साहित्‍य

तुलसीदास
रामचरित मानस, कवितावली विनय पत्रिका, गीतावली
सूरदास
सूरसागर
रसखान
प्रेमवाटिका
मलिक मुहम्‍मद जायसी
पद्मावत
बिहारीलाल
बिहारीसतसई
भूषण
शिवराज भूषण
नरोत्‍तम दास
सुदामा चरित

उर्दू साहित्‍य - उर्दू भाषा का विकास दिल्‍ली सल्‍तनत काल में हुआ था लेकिन भाषा के रुप मे इसका विकास परवर्ती मुगलो के काल मे हुआ। अमीर खुसरो ने इसे कविता का माध्‍यम बनाया। मुहम्‍मद शाह(1719-1748) के काल मे उर्दू का सर्वाधिक विकास हुआ।

फारसी- यह मुगल दरबार की भाषा थी। अकबर का काल फारसी भाषा के पुनर्जागरण का काल था। अकबर का नवरत्‍न फैजी,अकबर का राजकवि और सर्वश्रेष्‍ठ फारसी विद्वान था। जहांगीर ने अपने शासनकाल के 16वें वर्ष तक अपनी आत्‍मकथा तुजुक-ए-जहांगोरी की रचना की। मुगलों मे फारसी का सर्वश्रेष्‍ठ विद्वान शाहजहां का बडा लडका दारशिकोह था। इसने भागवद् गीता, उपनिषद तथा रामायण का फारसी अनुवाद कराया। 52उपनिषदों का फारसी अनुवाद सीर-ए-अकबर(महान रहस्‍य) कहलाया। अन्‍य प्रमुख फारसी साहित्‍य निम्‍न है

बाबरनामा यह स्‍वयं बाबार द्वारा तुर्की मे लिखित तुजुक-ए-बाबरी का फारसी मे अनुदान है जिसे अब्‍दुर्रहीम खानखाना ने 1583ई. मे किया।

हुमायूंनामा - यह गुलबदन बेगम द्वारा दो भागो मे लिखित हुमायूं की आत्‍मकथा है।

तारीख-ए-अकबरी – इसकी रचना अब्‍दुल कादिर बदायूंनी ने 1590ई. मे तीन भागो मे की थी। यह भारत के इतिहास से संबंधित है।

तुजुक-ए-जहांगीरी – यह जहांगीर की आत्‍मकथा है जो उसी के द्वारा लिखि गई है

पादशाहनामा- यह तीन भागों मे लिखित शाहजहां के शासनकाल का इतिहास है। पहला भाग मोहम्‍मद अमीन कजवीनी द्वारा, दूसरा भाग अब्‍दुल हमीद लाहौरी द्वारा तथा तीसरा भाग मोहम्मद वारिस द्वारा रचित है।

शाहजहांनामा – इसकी रचना इनायत खां ने की। यह औरगजेब के पहले कुछ वर्षो का इतिहास है

आलमगीनामा- यह भी औरंगजेब के काल का इतिहास है। इसकी रचना काजिम शीराजी ने की थी

प्रमुख अनुवादित रचनाएं (फारसी भाषा मे)


रचना
अनुवादक
रामायण
अब्‍दुल कादिर बदायुंनी
महाभारत (रज्‍मनामा)
बदायुंनी व नकीब खां
पंचतात्र (अनवर ए सुहैली)
अबुल फजल
तुजुक-ए-बाबरी
रहीम
भगवत पुराण
राजा टोडरमनल
लीलावती
फैजी
अथर्ववेद
हादी इब्राहिम सर हिंदी

मुगलकालीन संगीत कला(Music)

मालवा के बाजबहादुर, अकबर, जहॉगीर और शाहजहां के काल में संगीत कला का बहुत विकास हुआ। अबुल-फजल के अनुसार अकबर के समय मे 36गायक थे। तानसेन के गुरु हरिदास थे। तानसेन ने ध्रुपद गायनकी खोज की। मियां की मल्‍हार और मियां की तोडी राग की खोज भी तानसेन ने ही की। तानसेन का वास्‍तविक नाम राम तनु पाण्‍डेय था।

















Viewed 1 Times

Post On 2021-12-03